मुंगेली जिले में सड़क निर्माण कार्य के लिए तालाबों से मिट्टी और मुरूम के अवैध उत्खनन का मामला सामने आया है। आरोप है कि खनिज विभाग की अनुमति के बिना तालाबों की खुदाई कर सामग्री का उपयोग किया जा रहा है।
मामला पथरिया जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत खैरा के आश्रित ग्राम मंदवानी का है। यहां एक निस्तारि तालाब में भारी मशीनों से खुदाई कर मिट्टी और मुरूम निकली जा रही है।

स्थानीय लोगों की शिकायत पर की गई पड़ताल में पाया गया कि तालाब में जेसीबी मशीन से खुदाई की जा रही थी और ट्रकों के माध्यम से मिट्टी-मुरूम का परिवहन किया जा रहा था। यह सामग्री बैतलपुर–मदकू मार्ग के सड़क निर्माण कार्य में उपयोग की जा रही है। सड़क निर्माण कार्य अनिल बिल्डकॉन द्वारा किया जा रहा है, जो लोक निर्माण विभाग से संबंधित बताया गया है।
मामले में ग्राम पंचायत के सरपंच ने बताया कि तालाब के गहरीकरण और सौंदर्यीकरण के लिए जिला पंचायत को प्रस्ताव भेजा गया है और उसी के अंतर्गत कार्य किया जा रहा है। वहीं मौके पर मौजूद जेसीबी चालक और ट्रक चालकों ने बताया कि वाहन रिंकू गुप्ता के हैं और उन्हीं के निर्देश पर खुदाई और परिवहन किया जा रहा है।
मौके पर आए एक व्यक्ति आदित्य वर्मा द्वारा प्रस्तुत शासकीय आदेश में तालाब के गहरीकरण और सौंदर्यीकरण के दौरान प्राप्त मिट्टी या मुरूम के परिवहन की अनुमति का उल्लेख है। आदेश में तालाब की खुदाई की अनुमति का उल्लेख नहीं पाया गया।
मौके पर ट्रक क्रमांक CG 10 AL 7483 सहित चार ट्रक अवैध उत्खनन और परिवहन में संलग्न पाए गए। इसके अलावा एक चेन माउंटेड जेसीबी मशीन भी खुदाई कार्य में लगी हुई थी।
बिना खनिज विभाग की अनुमति के तालाब से मिट्टी और मुरूम का उत्खनन नियमों के विरुद्ध माना जाता है। मामले में संबंधित विभागों द्वारा किसी कार्रवाई की जानकारी नहीं मिली है।
प्रशासन को खुली चुनौती?
बिना खनिज विभाग की विधिवत अनुमति के तालाब से मिट्टी-मुरूम निकालना पूरी तरह अवैध है। ठेकेदार, पंचायत प्रतिनिधि और ट्रांसपोर्टरों की आपसी मिलीभगत से यह अवैध उत्खनन न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि शासन के नियम-कायदों की खुलेआम धज्जियां भी उड़ा रहा है। यह पूरा मामला प्रशासन को मुंह चिढ़ाने जैसा प्रतीत हो रहा है।


बड़े सवाल खड़े होते हैं—
- जब आदेश में केवल परिवहन की अनुमति है, तो खुदाई किसके आदेश से की जा रही है?
- क्या तालाब के गहरीकरण के नाम पर सड़क निर्माण के लिए मिट्टी-मुरूम का अवैध खखन किया जा सकता है?
- खनिज विभाग और राजस्व अमला अब तक इस पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा?
- क्या PWD के ठेकेदारों को अवैध उत्खनन की खुली छूट मिली हुई है?
- तालाब जैसे सार्वजनिक जलस्रोत को नुकसान पहुंचाने की जवाबदेही किसकी होगी?
अब देखने वाली बात यह होगी कि समाचार प्रकाशन के बाद इस मामले में जिला प्रशासन और खनिज विभाग आंखें मूंदे रहता है, या फिर अवैध उत्खनन में शामिल ठेकेदारों, ट्रांसपोर्टरों और जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई की जाती है।