मुंगेली, 30 मार्च 2026।
कहते हैं कि लालच इंसान से उसका विवेक छीन लेता है, लेकिन जब यही लालच खून के रिश्तों को भी खत्म कर दे, तो समाज सन्न रह जाता है। मुंगेली जिले में सामने आया एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला मामला, जहां संपत्ति की हवस में अपनों ने ही अपने सगे भाई की हत्या की साजिश रच डाली। इतना ही नहीं, हत्या के बाद मृतक की पत्नी और बेटे को ही आरोपी साबित करने और समाज में बदनाम करने की साजिश भी रची गई।
जिले में सेवानिवृत्त लेखापाल दामोदर राजपूत के अपहरण और हत्या के मामले में मुंगेली पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए पूरे षड्यंत्र का खुलासा किया है। इस मामले में 11 आरोपियों और 4 नाबालिगों को गिरफ्तार किया गया है। थाना लालपुर में अपराध क्रमांक 40/26 के तहत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है

पुलिस के अनुसार 21 मार्च 2026 को दामोदर राजपूत घर से निकले थे, जिसके बाद उनकी मोटरसाइकिल ग्राम मनोहरपुर के पास लावारिस हालत में मिली। 22 मार्च को गुमशुदगी दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज में एक संदिग्ध ईऑन कार मृतक का पीछा करते हुए नजर आई, जिसके आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही।

पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि मृतक के भाई रणजीत राजपूत, चचेरे भाई रामपाल राजपूत सहित अन्य परिजनों ने संपत्ति हड़पने के लिए पूरी साजिश रची थी। आरोपियों ने 10 लाख रुपये और जमीन का लालच देकर संजय यादव और उसके साथियों को हत्या की सुपारी दी। योजना के तहत 21 मार्च को सुनसान रास्ते में दामोदर राजपूत की गाड़ी रोककर गमछे से गला घोंटकर हत्या कर दी गई।
हत्या के बाद शव को वाहन में ले जाकर कवर्धा जिले के पंडरिया क्षेत्र के जंगल में दफना दिया गया। 29 मार्च को आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने शव बरामद किया, जिसकी पहचान परिजनों द्वारा की गई।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने पहले ही मृतक को उसके बेटे से खतरा बताकर मानसिक रूप से भ्रमित किया और संपत्ति अपने नाम कराने के लिए फर्जी वचनपत्र तैयार कराया। हत्या के बाद साजिश के तहत मृतक का मोबाइल प्रयागराज ले जाकर गंगा नदी में फेंक दिया गया, ताकि जांच को गुमराह किया जा सके और शक की सुई मृतक के परिवार पर जाए।
पुलिस ने आरोपियों के पास से 96 हजार रुपये नकद, घटना में प्रयुक्त ईऑन कार, स्पेशियो गोल्ड कार, मोटरसाइकिल और स्कूटी जब्त की है। सभी आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है, जबकि 4 नाबालिगों को बाल संप्रेषण गृह भेजा गया है।
इस पूरे मामले में साइबर सेल, थाना लालपुर, लोरमी और जरहागांव पुलिस की संयुक्त टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।