मुंगेली। जिला जनसंपर्क विभाग के तत्कालीन सहायक संचालक सुजीत कुमार सिंह के खिलाफ कथित अवैध वसूली, विज्ञापन भुगतान में अनियमितता और पत्रकारों के प्रति कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के आरोपों को लेकर मुंगेली के कुछ मीडिया प्रतिनिधियों ने राज्यपाल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है।
ज्ञापन के माध्यम से पत्रकारों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने और आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार सुजीत कुमार सिंह का अगस्त 2026 में मुंगेली से रायगढ़ स्थानांतरण किया गया था।

15 अगस्त के विज्ञापनों के भुगतान को लेकर आरोप
मीडिया प्रतिनिधियों का आरोप है कि 15 अगस्त के विज्ञापनों के भुगतान के नाम पर कलेक्ट्रेट के विभिन्न विभागों से करीब 32 से 35 लाख रुपये की राशि कथित रूप से वसूली गई। पत्रकारों के अनुसार उन्हें अपने विज्ञापनों के भुगतान के संबंध में संबंधित विभागों से जानकारी लेने पर इस संबंध में जानकारी मिली।
आरोप है कि कुछ विभागीय अधिकारियों ने मीडिया प्रतिनिधियों को बताया कि उनके विज्ञापनों से संबंधित भुगतान तत्कालीन सहायक संचालक/जनसंपर्क अधिकारी सुजीत कुमार सिंह द्वारा पहले ही लिया जा चुका है। इसके बाद पत्रकारों ने इस संबंध में सुजीत सिंह से जानकारी मांगी।

कथित टिप्पणियों को लेकर भी जताई नाराजगी
पत्रकारों का आरोप है कि बातचीत के दौरान सुजीत कुमार सिंह ने विज्ञापन भुगतान से जुड़े मामले में कथित रूप से कुछ बातें स्वीकार कीं और मुंगेली के पत्रकारों के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया।
मीडिया प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि पत्रकारों को लेकर कथित तौर पर ‘गांजा बेचने वाले’ और ‘50-100 रुपये में बिकने वाले’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया। इन कथित टिप्पणियों को लेकर पत्रकारों ने नाराजगी जताई है और इसे पत्रकारिता से जुड़े लोगों के सम्मान का विषय बताया है।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत का भी हवाला
मीडिया प्रतिनिधियों के अनुसार इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में भी शिकायत दर्ज कराई गई है। उनका कहना है कि शिकायत के करीब 15 दिन बाद भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।
इसके बाद पत्रकारों ने राज्यपाल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की।
दस्तावेजों की जांच की मांग
ज्ञापन में पत्रकारों ने संबंधित विभागों से विज्ञापन भुगतान के अभिलेखों की जांच, विज्ञापन बिलों एवं भुगतान रसीदों का सत्यापन और संबंधित अधिकारियों के बयान दर्ज करने की मांग की है।
मीडिया प्रतिनिधियों ने यह भी मांग की है कि कथित 32 से 35 लाख रुपये की राशि से जुड़े भुगतान की जांच की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि राशि किन विभागों से, किसके नाम पर और किस मद में जारी की गई।
फिलहाल इन आरोपों की जांच और सत्यापन के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।