गरियाबंद कोर्ट ने आरोपी को 20 वर्ष सश्रम कारावास सुनाया
गरियाबंद में फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय ने 28 नवंबर 2025 को नाबालिग पीड़िता को प्रेमजाल में फंसाकर भगा ले जाने और दुष्कर्म करने के दोषी पोषराम ध्रुव (21), निवासी मुड़ागांव, थाना छुरा, को 20 वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई। यह कार्रवाई पॉक्सो एक्ट की धारा 06 एवं 4(2) तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) और 87 के तहत की गई।
विशेष लोक अभियोजक हरि नारायण त्रिवेदी ने बताया कि पीड़िता के पिता ने 25 अगस्त 2024 को थाना फिंगेश्वर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी 13 वर्ष 4 माह की नाबालिग बेटी घर से अचानक लापता हो गई। खोजबीन के बाद भी न मिलने पर अज्ञात व्यक्ति द्वारा बहला-फुसलाकर भगाने का मामला दर्ज किया गया।

विवेचना में उजागर हुआ पूरा घटनाक्रम
जांच के दौरान पीड़िता की बरामदगी के बाद उसने बयान दिया कि आरोपी पोषराम ध्रुव उसे नाबालिग जानते हुए शादी का झांसा देकर अपने साथ भगा ले गया था। उसने पीड़िता को गांव के खेत स्थित सुनसान मकान में रखकर जबरदस्ती दुष्कर्म किया।
घटना की पुष्टि होने पर पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध पॉक्सो एक्ट और संबंधित धाराओं के तहत आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
11 गवाहों के आधार पर अदालत का निर्णय
अभियोजन पक्ष की ओर से 11 गवाहों ने बयान देकर घटना को प्रमाणित किया। बहस के दौरान विशेष लोक अभियोजक ने अदालत से कठोर दंड देने की मांग की, ताकि नाबालिग लड़कियों के विरुद्ध ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाया जा सके।
अपर सत्र न्यायाधीश यशवंत वासनीकर ने मामले की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए आरोपी को दोषी करार दिया। कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट की धारा 06 एवं 4(2) के तहत 20 वर्ष सश्रम कारावास और जुर्माना, धारा 137(2) के तहत 2 वर्ष सश्रम कारावास और जुर्माना, तथा धारा 87 के तहत 2 वर्ष सश्रम कारावास और जुर्माना की सजा सुनाई।