जैव विविधता संरक्षण में आदिवासियों की भूमिका पर विश्व आदिवासी दिवस समारोह


मुंगेली — डॉ. भीमराव अम्बेडकर शिक्षण संस्थान द्वारा संचालित आवासीय विद्यालय में स्वच्छता अभियान के साथ विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह, डॉ. भीमराव अम्बेडकर एवं राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुई।

संस्थान अध्यक्ष राजेन्द्र दिवाकर एवं व्यवस्थापक एच.आर. भास्कर के निर्देशन में शिक्षकों ने छात्रों को आदिवासी जनसंख्या, संस्कृति, परंपराएं, भाषा, तीज-त्योहार एवं शिक्षा संबंधी जानकारी दी। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस घोषित किए जाने के इतिहास पर भी चर्चा हुई।

छत्तीसगढ़ में आदिवासी जनसंख्या 32% से अधिक है। शहीद वीर नारायण सिंह और लोकनायक बिरसा मुंडा को आदिवासी आंदोलन के प्रतीक के रूप में याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी जल, जंगल और जमीन के संरक्षक हैं और जैव विविधता एवं पर्यावरण संरक्षण में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन आज वे विस्थापन, सुविधाओं की कमी और संसाधनों के दोहन से प्रभावित हैं।

कार्यक्रम के अंत में “जय भीम-जय भारत, जय संविधान, जय मूलनिवासी-जय आदिवासी” के नारे लगाए गए और सभी को विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं दी गईं। इस अवसर पर संस्थान पदाधिकारी, प्राचार्य आशा दिवाकर, सह-प्राचार्य छत्रपाल डाहिरे, शिक्षक-शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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Author: Nawabihan

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