रायपुर, 18 जुलाई 2025।
छत्तीसगढ़ विधानसभा ने शुक्रवार को ऐतिहासिक जनविश्वास विधेयक 2025 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। यह विधेयक राज्य में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग को बढ़ावा देने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। इसके तहत अब छोटे-मोटे तकनीकी उल्लंघनों या त्रुटियों पर आपराधिक मुकदमे की बजाय केवल प्रशासकीय जुर्माना लगाया जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इसे “विकसित भारत, विकसित छत्तीसगढ़” की दिशा में बड़ा निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक आम नागरिकों, उद्यमियों और व्यवसायियों के लिए राहत का संदेश है, जो अब छोटी भूलों के लिए जेल जाने या आपराधिक मामलों में उलझने से बच सकेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तावित भारतीय न्याय संहिता की भावना को साकार करने की बात कही।
क्या है जनविश्वास विधेयक?
जनविश्वास विधेयक का उद्देश्य ब्रिटिश कालीन कठोर कानूनों में संशोधन करना है, जो नागरिकों की मामूली चूकों को भी अपराध मानते थे। इसके तहत राज्य के 8 अधिनियमों के 163 प्रावधानों में संशोधन किया गया है।
इनमें शामिल हैं:
- छत्तीसगढ़ नगरीय प्रशासन अधिनियम
- नगर एवं ग्राम निवेश अधिनियम
- सहकारी सोसायटी अधिनियम
- औद्योगिक संबंध अधिनियम
- छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम 1915
- सोसायटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम, आदि।
प्रमुख बदलाव:
- सार्वजनिक स्थान पर शराब पीने पर पहली बार जुर्माना, और पुनरावृत्ति पर जुर्माना व कारावास।
- मकान मालिक द्वारा किराया वृद्धि की सूचना न देने पर अब आपराधिक मामला नहीं, केवल ₹1,000 तक का जुर्माना।
- वार्षिक प्रतिवेदन जमा न करने वाली सोसायटियों पर अब केवल नाममात्र का आर्थिक दंड, विशेषकर महिला समूहों के लिए।
- सहकारी शब्द के अनजाने में प्रयोग पर अब आपराधिक मुकदमा नहीं, सिर्फ प्रशासनिक दंड।
छत्तीसगढ़ बना देश का दूसरा राज्य
मध्य प्रदेश के बाद अब छत्तीसगढ़ देश का दूसरा राज्य बन गया है जिसने यह विधेयक पारित कर न्यायिक प्रणाली पर बोझ कम करने और आर्थिक एवं प्रशासनिक सुधार की दिशा में मजबूत पहल की है।
यह विधेयक स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ सरकार अपराध की श्रेणी में केवल गंभीर कृत्यों को रखने की पक्षधर है, जबकि लघु त्रुटियों को सुधार योग्य मानते हुए न्यायसंगत नीति की ओर अग्रसर हो रही है।