उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने रायपुर के नया रायपुर स्थित संवाद ऑडिटोरियम में गृह एवं जेल विभाग की उपलब्धियों पर पत्रकारों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों के प्रयोग से पुलिस प्रक्रिया तेज और आसान हुई है।
उन्होंने बताया कि आईसीजेएस के तहत पुलिस, अभियोजन, फॉरेंसिक, जेल और न्यायालय को एकीकृत करने में राज्य अग्रणी है। दुर्ग और बिलासपुर जिलों में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू कर मॉडल जिला बनाया गया है। ई-साक्ष्य व्यवस्था से साक्ष्य उपलब्धता में तेजी आई है।
पुलिस आधुनिकीकरण के लिए सीसीटीएनएस, ई-साक्ष्य, ई-सम्मन, ऑनलाइन एफआईआर, ई-साइन, ई-कोर्ट और ई-श्रुति जैसी व्यवस्थाओं का उपयोग किया जा रहा है। पुलिस कर्मियों के लिए 8 बैंकों के साथ एमओयू कर बिना प्रीमियम सैलरी अकाउंट पर बीमा सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसके तहत 15 शहीद पुलिसकर्मियों के आश्रितों को 16 करोड़ रुपये से अधिक राशि दी गई है।
शिकायतों के निराकरण हेतु ऑनलाइन कंप्लेंट मैनेजमेंट पोर्टल बनाया गया है। इससे शिकायतों के प्रेषण और जांच की प्रक्रिया ऑनलाइन हो गई है, जिससे समय और संसाधनों की बचत हो रही है।
अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित की गई है। विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए 34 लोगों को देश से निष्कासित किया गया है। एंटी टेररिस्ट स्क्वाड को भी सक्रिय किया गया, जिसमें वर्ष 2025 में पहली कार्रवाई दर्ज हुई।

गौवंश वध, परिवहन और व्यापार रोकने के लिए कार्रवाई करते हुए 142 वाहन राजसात और 27 वाहनों की नीलामी की गई है। आदतन आरोपियों की सूची बनाकर 19 लोगों पर गैंगस्टर अधिनियम के तहत निगरानी रखी जा रही है।
नशे के कारोबार के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई जारी है। नशीले पदार्थों के मामलों में संपत्ति जब्ती और वाहनों की नीलामी की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
साइबर अपराध के मामलों में ऑनलाइन फ्रॉड खातों को सीज किया गया तथा फर्जी सिम जारी करने वाले 165 संचालकों को गिरफ्तार किया गया। अनाधिकृत ऑनलाइन गैम्बलिंग के 255 लिंक और पोर्टल रोके गए तथा कई जिलों में साइबर थानों का संचालन शुरू हुआ।
बस्तर क्षेत्र की शांति के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा तय 31 मार्च 2026 की समयसीमा पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार अडिग है। पुनर्वास योजनाओं के तहत कई लोगों ने मुख्यधारा में लौटने का रास्ता चुना है।
जेल व्यवस्थाओं के संबंध में रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और अंबिकापुर केंद्रीय जेलों को आईएसओ प्रमाणन मिला है। केंद्रीय जेल रायपुर में बंदियों के लिए “उमंग-तरंग” रेडियो स्टेशन संचालित किया जा रहा है तथा विभिन्न उद्योगों के माध्यम से कौशल विकास कार्य चल रहा है।