रायपुर, छत्तीसगढ़ —
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर एक बड़ी अखबार की खबर साझा करते हुए ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) और एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
भूपेश बघेल ने फेसबुक पोस्ट में लिखा —
> “भयावह है यह!
अब जांच एजेंसियाँ झूठे बयानों और सबूतों का निर्माण भी खुद ही करने लगी हैं क्या?
किसी को भी फँसाने के लिए अब जांच एजेंसियाँ सुपारी ले रही हैं क्या?”
उन्होंने आगे कहा कि ईओडब्ल्यू/एसीबी पर झूठे साक्ष्य तैयार कर अदालत के साथ आपराधिक धोखाधड़ी करने की शिकायत बेहद गंभीर है।
भूपेश बघेल के अनुसार, वकीलों की शिकायत पर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) ने ईओडब्ल्यू/एसीबी के निदेशक, उप पुलिस अधीक्षक और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में यह भी उल्लेख किया कि यह देश की न्यायिक व्यवस्था में संभवतः पहली बार हुआ है, जब किसी जांच एजेंसी ने अभियुक्त का बयान दर्ज कराने की बजाय अपने कार्यालय में तैयार किया गया बयान अभियुक्त का बयान बताकर उस पर हस्ताक्षर करवा लिए।
भूपेश बघेल ने लिखा कि यदि जांच एजेंसियाँ इसी प्रकार काम करेंगी, तो किसी भी नागरिक को न्याय मिलने की संभावना समाप्त हो जाएगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि माननीय हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले का संज्ञान लेंगे।
उ
ल्लेखनीय है कि यह मामला हाल ही में सामने आई एक बड़ी खबर से जुड़ा है, जिसमें ईओडब्ल्यू और एसीबी पर फर्जी साक्ष्य तैयार करने के आरोप लगाए गए हैं। इस घटना ने प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है और न्यायिक प्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं।

