धान खरीदी केंद्र में अव्यवस्था चरम पर, किसानों से अधिक वजन

मुंगेली | विशेष रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का कार्य पूरे जोर-शोर से जारी है, लेकिन मुंगेली जिले के मुंगेली विकासखंड अंतर्गत पौनी धान खरीदी केंद्र में सामने आई हकीकत शासन के दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। रिपोर्टिंग के दौरान यहां किसानों के साथ हो रहे शोषण, अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही के गंभीर मामले सामने आए हैं।

शासन के मापदंडों की अनदेखी

शासन द्वारा स्पष्ट रूप से यह तय किया गया है कि प्रति बोरा धान का वजन 40 किलो 700 ग्राम ही लिया जाए। इसके बावजूद पौनी खरीदी केंद्र में किसानों से इससे अधिक वजन लिया जा रहा है। किसानों का आरोप है कि यदि बोरा तय वजन पर होता है, तो समिति प्रबंधन खरीदी से मना कर देता है।

खरीदी प्रभारी का तर्क, सवाल बरकरार

अधिक वजन को लेकर जब खरीदी प्रभारी से बात की गई तो उन्होंने दलील दी कि धान का उठाव समय पर नहीं हो पा रहा है। धान लंबे समय तक केंद्र में पड़ा रहने से सूख जाता है, जिससे वजन में कमी (शॉर्टेज) आ जाती है। बाद में प्रशासन इस शॉर्टेज का आरोप खरीदी प्रभारी और समिति पर लगाता है, इसलिए पहले ही किसानों से अधिक वजन लिया जा रहा है।

हालांकि, यह तर्क कई सवाल खड़े करता है—
क्या प्रशासनिक लापरवाही और उठाव में देरी की भरपाई किसानों से की जानी चाहिए?
क्या शासन के तय मापदंडों को ताक पर रखकर किसानों पर बोझ डालना न्यायसंगत है?

धान उठाव नहीं, जगह की भारी कमी

रिपोर्टिंग के दौरान यह भी स्पष्ट रूप से देखा गया कि पौनी धान खरीदी केंद्र में धान का नियमित उठाव नहीं हो रहा है। इसके कारण केंद्र में धान रखने की जगह की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। खरीदी केंद्र परिसर में चारों ओर बोरियों के ढेर लगे हुए हैं, जिससे अव्यवस्थित स्थिति बनी हुई है और किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।

किसानों से अतिरिक्त मेहनत, डर का माहौल

किसानों ने बताया कि उनसे धान की बोरियां पलटवाई जाती हैं और सिलाई का कार्य भी खुद ही कराया जाता है। कई किसान कैमरे के सामने आने से डरे रहे। उनका कहना है कि सहकारी समिति से ही उन्हें किसान क्रेडिट कार्ड, खाद और बीज जैसी जरूरी सुविधाएं मिलती हैं। यदि वे विरोध करते हैं, तो भविष्य में उनके काम रोके जा सकते हैं।

यह डर किसानों को चुप रहने पर मजबूर कर रहा है, जिससे शोषण की यह व्यवस्था साल-दर-साल चलती आ रही है।

प्रशासनिक जवाबदेही जरूरी

पौनी धान खरीदी केंद्र की स्थिति यह दर्शाती है कि धान उठाव, भंडारण और खरीदी व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं। इन खामियों का खामियाजा सीधे किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

जिला प्रशासन मुंगेली को चाहिए कि वह तत्काल

धान के नियमित उठाव की व्यवस्था करे,

खरीदी केंद्रों में शासन के मापदंडों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करे,

और किसानों से किए जा रहे अतिरिक्त वजन व अवैध श्रम पर रोक लगाए।


अन्यथा समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की यह व्यवस्था किसानों के लिए राहत नहीं, बल्कि शोषण का माध्यम बनती चली जाएगी।

Nawabihan
Author: Nawabihan

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *