बलरामपुर, छत्तीसगढ़/
पत्रकारिता जैसे जिम्मेदार और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ माने जाने वाले पेशे को बदनाम करने वाला एक शर्मनाक मामला बलरामपुर जिले से सामने आया है। खुद को पत्रकार बताने वाला एक आरोपी सात वर्षों तक एक महिला का शारीरिक शोषण करता रहा और अंततः पुलिस की त्वरित कार्रवाई में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
थाना कोतवाली बलरामपुर पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी अली खान उर्फ अली हुसैन अंसारी (उम्र 35 वर्ष), निवासी ग्राम खपरो, थाना रंका, जिला गढ़वा (झारखंड), जो वर्तमान में ग्राम चंद्रनगर (चौकी तातापानी, थाना रामानुजगंज) में निवासरत था, खुद को पत्रकार बताकर महिला को धमका कर शोषण करता रहा।
पीड़िता ने बताया कि आरोपी वर्ष 2018-19 से मोबाइल के माध्यम से संपर्क में आया और धीरे-धीरे अश्लील बातचीत शुरू कर दी। जब महिला ने इसका विरोध किया, तो आरोपी ने जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद आरोपी ने उसकी शादीशुदा जिंदगी को खराब करने की धमकी देकर 2019 से जून 2025 तक कई बार जबरन शारीरिक शोषण किया। महिला के मुताबिक आरोपी ने पैसे की भी मांग की और हाल ही में एक लाख रुपये की फिरौती मांगी तथा उसके पति को गोली मारने की धमकी भी दी थी
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 308(5), 351(3), 78, 64(2)(m) बीएनएस तथा अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(v), 3(2)(va) के तहत अपराध क्रमांक 100/2025 दर्ज किया। वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को 12 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

पत्रकारिता को बदनाम करने वालों की खुली निंदा जरूरी
यह घटना सिर्फ एक महिला के खिलाफ नहीं, बल्कि संपूर्ण पत्रकारिता जगत की प्रतिष्ठा पर हमला है। पत्रकारिता का कार्य सच्चाई को सामने लाना और जनता की आवाज़ बनना है, न कि किसी के भरोसे का शोषण करना।
पत्रकारिता कोई ‘प्रेस कार्ड’ या माइक का नाम नहीं है — यह एक जिम्मेदारी है, एक सेवा भाव है। इस पेशे को ढाल बनाकर निजी स्वार्थ और घिनौने अपराध को अंजाम देना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि नैतिक रूप से भी समाज के लिए सबसे घातक उदाहरण है।